स्मार्ट पोल/ स्ट्रीट लाइट का 640 करोड़ का प्रोजेक्ट लेकिन पोल पर सिर्फ विज्ञापन, वाइफाई और एन्वायरर्मेंट सेंसर का तो पता ही नहीं भोपाल। स्मार्ट सिटी की 25 जून को तीसरी सालगिरह है। भोपाल शहर को स्मार्ट बनाने के लिए 1247 करोड़ के प्रोजेक्ट चल रहे हैं। इसमें 600 करोड़ से ज्यादा तो खर्च भी हो चुके हैं। हालांकि शहर की तस्वीर में ज्यादा कोई बदलाव नहीं दिख रहा है। स्मार्ट पोल पर विज्ञापन जरूर झलकने लगे हैं लेकिन वो एन्वार्नमेंट सेंसर, वाई फाई जैसे दावे अभी तक तो हवाई ही लग रहे हैं। 300 करोड़ रुपए में तैयार हुआ कमांड एंड कंट्रोल सेंटर तो है लेकिन अब तक आम आदमी की तकलीफें दूर करने में कारगर नहीं हो सका है। 640 करोड़ के स्मार्ट पोल और स्ट्रीट लाइटों का भी जमीन पर असर नहीं दिख रहा है। 17 करोड़ के आईटीएमएस से ऑटो चालान जनरेट होने के दावे तो हो रहे हैं लेकिन हकीकत आप भी जानते हैं कि शहर की हर सड़क और चौराहे पर रोजाना पुलिस अफसर चैकिंग के नाम पर नगदी वसूल रहे हैं। इस सबके बावजूद स्मार्ट सिटी कंपनी के अधिकारियों का तर्क है कि भोपाल देश में रेट्रोफिटिंग मॉडल वाला इकलौता शहर है। उनका ये भी तर्क है कि...