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Showing posts from July, 2018

भोपाल में रिकार्ड बनाने के फेर में बिना तैयारी लगा दिया 235फीट पर तिरंगा

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भोपाल में पैदल चलना जान जोखिम में डालने से कम नहीं

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सरकारी दफ्तरों में आम आदमी की शिकायतें....

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शहर की सड़कों को सुधारने का सरकारी कारोबार

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आम जनता का पैसा सरकारी बंगलों पर कैसे लुटाया जाता है जानिए

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माइक्रोफाइनेंस.... बिना गारंटी लोन कोई एनपीए नहीं

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मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना की हकीकत

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नक्सलियों ने छोड़े हथियार.. मुख्य धारा में लौटने की कोशिश

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बालाघाट के जंगलों में जिंदगी की नई रंगत... नक्सलियों का खौफ खत्म

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भारत में न्याय और पुलिस व्यवस्था पर जस्टिस मलिमथ और प्रकाश सिंह की राय

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बुंदेलखंड में सरकारी योजनाओं का हाल जानिए... 20 अक्टूबर 2015

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स्मार्ट सिटी के तीन साल…1247 करोड़ के प्रोजेक्ट चल रहे हैं, आधे से ज्यादा तो पूरे भी हो गए कंट्रोल रूम स्मार्ट हुए, हम पर कोई असर नहीं

स्मार्ट पोल/ स्ट्रीट लाइट का 640 करोड़ का प्रोजेक्ट लेकिन पोल पर सिर्फ विज्ञापन, वाइफाई और एन्वायरर्मेंट सेंसर का तो पता ही नहीं  भोपाल। स्मार्ट सिटी की 25 जून को तीसरी सालगिरह है। भोपाल शहर को स्मार्ट बनाने के लिए 1247 करोड़ के प्रोजेक्ट चल रहे हैं। इसमें 600 करोड़ से ज्यादा तो खर्च भी हो चुके हैं। हालांकि शहर की तस्वीर में ज्यादा कोई बदलाव नहीं दिख रहा है। स्मार्ट पोल पर विज्ञापन जरूर झलकने लगे हैं लेकिन वो एन्वार्नमेंट सेंसर, वाई फाई जैसे दावे अभी तक तो हवाई ही लग रहे हैं। 300 करोड़ रुपए में तैयार हुआ कमांड एंड कंट्रोल सेंटर तो है लेकिन अब तक आम आदमी की तकलीफें दूर करने में कारगर नहीं हो सका है। 640 करोड़ के स्मार्ट पोल और स्ट्रीट लाइटों का भी जमीन पर असर नहीं दिख रहा है। 17 करोड़ के आईटीएमएस से ऑटो चालान जनरेट होने के दावे तो हो रहे हैं लेकिन हकीकत आप भी जानते हैं कि शहर की हर सड़क और चौराहे पर रोजाना पुलिस अफसर चैकिंग के नाम पर नगदी वसूल रहे हैं। इस सबके बावजूद स्मार्ट सिटी कंपनी के अधिकारियों का तर्क है कि भोपाल देश में रेट्रोफिटिंग मॉडल वाला इकलौता शहर है। उनका ये भी तर्क है कि...